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Monday, May 23, 2022
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अनेक मजबूत राजनीतिक परिवारों को हाशिये पर धकेलने वाले मुख्यमंत्री गहलोत पर पायलट पड़ रहे हैं भारी

 

अशफाक कायमखानी

साल 1998 में राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनने के बाद से पार्टी में मौजूद गहलोत के मुकाबले में मजबूत लीडर्स धीरे-धीरे एक-एक करके राजनीतिक तौर पर हाशिये पर चले गए। इन्हें धकेलने में गहलोत लगातार कामयाब होते गए लेकिन प्रदेश के मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को हाशिये पर धकेलने की लाख कोशिश करने के बावजूद भी सचिन पायलट, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की हर चाल को नाकाम करते हुए उन पर भारी चाहे ना पड़े लेकिन कमजोर भी नहीं पड़ रहे हैं।

1998 में राजस्थान कांग्रेस का बहुमत आने पर दिल्ली तिकड़म के बल पर अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनने के बाद चालाकी व कूटनीति के साथ मिले हर अवसर का उपयोग करते हुए कांग्रेस में मौजूद मजबूत राजनीतिक परिवारों को एक-एक करके हाशिये पर धकेलने का काम सफलतापूर्वक अंजाम दिया। पंडित नवल किशोर शर्मा के बाद उनके पुत्र ब्रज किशोर शर्मा, परसराम मदेरणा के बाद भंवरी देवी के बहाने उनके पुत्र महिपाल मदेरणा व उसी के साथ रामसिंह विश्नोई के पुत्र मलखान सिंह विश्नोई, नाथूराम मिर्धा व रामनिवास मिर्धा परिवार के ज्योति मिर्धा-हरेंद्र मिर्धा व रिछपाल मिर्धा को राजनीतिक हाशिये पर आसानी से धीरे-धीरे ढकेलने में गहलोत कामयाब हो चुके हैं। उक्त परिवार से एक दो विधायक जरूर बने हैं जो एकदम नए होने के कारण वो किसी भी रूप में गहलोत के लिए लंबे समय तक चेलैंज नहीं हो सकते हैं।

अनेक मजबूत राजनीतिक परिवारों को हाशिये पर धकेलने वाले मुख्यमंत्री गहलोत पर पायलट पड़ रहे हैं भारी
      अनेक मजबूत राजनीतिक परिवारों को हाशिये पर धकेलने वाले मुख्यमंत्री गहलोत पर पायलट पड़ रहे हैं भारी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी राजनीतिक कूटनीति व चालाकी से चाल चलने की कला के बल पर अपने उदय के बाद से कांग्रेस में मौजूद हर राजस्थानी मजबूत राजनीतिक परिवार को हाशिये पर धकेलते हुए अपने राजनीतिक रास्ते को साफ सुथरा बनाने में कामयाब रहे। पर अचानक यूपी के सारणपुर निवासी पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट के पुत्र, जो राजनीति में पावर लेकर पैदा हुए सचिन पायलट के राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनकर आने के बाद से अशोक गहलोत ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लाख जतन करने के बावजूद हटे नहीं बल्कि इसके विपरीत पायलट अध्यक्ष पद के अलावा उपमुख्यमंत्री पद पर भी कायम हो गए।

विधानसभा व लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत के मुकाबले पायलट के बराबर मजबूत स्तंभ की तरह खड़े होने से मुख्यमंत्री गहलोत असहज महसूस करने लगे थे। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री की दौड़ में चाहे गहलोत आगे भले निकल गए पर वो पायलट को राजनीतिक तौर पर हाशिये पर धकेलने पर कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।

जब देश के अनेक प्रदेशों में भाजपा वहां कायम कांग्रेस सरकार को गिराने व कांग्रेस विधायकों से पाला बदलवाने व त्याग पत्र दिलवाले में कामयाब होती जाने लगी तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उक्त अवसर का उपयोग सचिन पायलट को राजनीतिक हाशिये पर धकेलने में करने के विकल्प तलाशने में करने लगे। मुख्यमंत्री गहलोत को उपमुख्यमंत्री पायलट को घेरने के लिए डेढ़ साल के कार्यकाल में पहली दफा राज्यसभा चुनाव का बहाना मिला। मतदान के पहले इनडायरेक्ट रूप से खरीद-फरोख्त के बहाने विधायकों की बाड़ाबंदी करके पायलट को निशाने पर लेने की कोशिश के बावजूद पायलट साफ बचकर निकल गए। इसके बाद भाजपा द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त करके सरकार गिराने की कोशिश पर एसओजी और एसीबी में दर्ज महेश जोशी की शिकायत पर कार्यवाही करने पर 11 जुलाई को मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा प्रेस कांफ्रेंस करके भाजपा नेताओं पर अनेक आरोप लगाते हुए फिर से पायलट को इनडायरेक्ट घेरने की कोशिश की है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 11 जुलाई की प्रेस कांफ्रेंस के बाद उनकी सरकार को समर्थन दे रहे 13 निर्दलीय विधायकों में से एसीबी की प्राथमिकी में दर्ज तीन निर्दलीय विधायक सुरेश टांक, सुखवीर व ओम प्रकाश हुड़ला को कांग्रेस समर्थक विधायकों की सूची से हटा दिया गया है जबकि मीडिया में भांति-भांति की खबरें चलने के बाद कांग्रेस विधायकों में भी अविश्वास का माहौल बन गया है। देर रात तक सीएमआर से विधायकों को फोन करके उनकी लोकेशन जानी जा रही थी। वहीं कुछ विधायक व मंत्री मुख्यमंत्री से मिलकर विश्वास भी जताते नजर आए।

कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनीयां व भाजपा नेताओं ने भी प्रेस कांफ्रेंस करके गहलोत के आरोपों का जवाब दिया है। वही रालोपा नेता सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे द्वारा लिखित स्क्रिप्ट बताया है। लेकिन दिन भर घटे घटनाक्रम के बावजूद उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की चुप्पी होने को सबको असमंजस में डाल रखा है। लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत का पायलट को राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने का लगाया ताजा दाव भी खाली जाएगा। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

 

बाबूलाल नागा
बाबूलाल नागाhttps://bharatupdate.com
हम आपको वो देंगे, जो आपको आज के दौर में कोई नहीं देगा और वो है- सच्ची पत्रकारिता। आपका -बाबूलाल नागा एडिटर, भारत अपडेट
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