30.6 C
Jaipur
Monday, May 23, 2022
Homeनजरिया911 के हमले से पाकिस्तान के संबंधों की व्यापक जांच जरूरी

911 के हमले से पाकिस्तान के संबंधों की व्यापक जांच जरूरी

भारत डोगरा

11 सितंबर 2001 को सबसे बड़े आतंकवादी हमले में संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 3000 व्यक्ति मारे जाए। इस अति त्रासद घटना का शीघ्र ही 20 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस अवसर पर संयुक्त राज्य अमेरिका में यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस हमले की जिम्मेदारी को और अधिक सुनिश्चित करने के लिए कुछ अपेक्षाकृत छिपे हुए पहलुओं की बेहतर जांच की जाए। इस दृष्टि से देखें तो विशेषकर इस हमले से पाकिस्तान के संबंधों की अधिक व्यापक जांच जरूरी है।

इस हमले को संक्षेप में 9/11 कहा जाता है। इस हमले के शीघ्र बाद भारतीय गुप्तचर एजेंसियों ने इस बारे में एक महत्त्वपूर्ण खोज की थी जिसे पश्चिमी गुप्तचर एजेंसियों ने भी प्रायः स्वीकार किया। इस जांच में बताया गया था कि 9/11 से कुछ ही समय पहले ओमर सईद शेख नामक शख्स ने मध्य-पूर्व से 19 हमलावरों के नेता मोहम्मद अट्टा को एक लाख डाॅलर भिजवाए व यह उसने पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आई.एस.आई. के उस समय के प्रमुख ले. जनरल महमूद अहमद के निर्देश पर किया। इस समाचार के टाइम्स ऑफ इंडिया व वाल स्ट्रीट जरनल जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद महमूद अहमद ने आई.एस.आई. मुखिया के अपने पद को छोड़ दिया ताकि यह मामला यहीं दब जाए।

ध्यान रहे कि ओमर सईद शेख वही शख्स है जिसे 1999 में भारतीय विमान के हाईजैकरों ने भारतीय जेलों में दो अन्य कैदियों के साथ छुड़ाया था। यह शख्स अलकायदा, बिन लादेन और आई.एस.आई. के करीब रहा, हालांकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ ने उसे ‘डबल एजेंट’ भी कहा था।

वाॅल स्ट्रीट जरनल ने आई.एस.आई. के संदिग्ध कार्यों की जांच रखी व उसके दक्षिण एशिया संवाददाता डेनियल पर्ल इस सिलसिले में वर्ष 2002 में कराची गए हुए थे। इसी समय उनका पहले अपहरण किया गया व फिर उनकी हत्या कर दी गई। इस सिलसिले में ओमर सईद शेख को एक मुख्य अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार कर लिया गया। उसे पहले मृत्यु दंड दिया गया पर फिर यह दंड बदल दिया गया व वह जेल में बना रहा। यहां से भी उसने जाली फोन काल कर भारत-पाक दुश्मनी भड़काने का प्रयास किया।

2003 में पाकिस्तान से यहां के नागरिक खलीद मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया गया। उसने ही बिल लादेन के साथ मिलकर 9/11 की साजिश रची थी। वह तब से संयुक्त राज्य अमेरिका की हिरासत में है। उसके आई.एस.आई से संबंध भी बताए गए हैं। उसके बारे में कहा गया है कि उसने हिरासत में पूछताछ के दौरान में डेनियल पर्ल के हमले में मुख्य भूमिका की बात स्वीकार की। इस तरह आई.एस.आई. की कुछ संदिग्ध व खतरनाक गतिविधियों की जांच कर रहे वरिष्ठ पत्रकार डेनियल पर्ल के हमले में ओमर सईद शेख व खलीद मोहम्मद शेख इन दोनों आतंकवादियों के शामिल होने की बात सामने आ चुकी है व इन दोनों के संबंध अलकायदा व आई.एस.आई. दोनों से थे।

फ्रांस के विख्यात समाचार पत्र ल फिगेरो ने 31 अक्टूबर 2001 को एक चौंका देने वाला समाचार प्रकाशित किया था जिसे बाद में विश्व के अनेक अन्य विख्यात समाचार पत्रों व मीडिया ने भी प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि बिन लादेन जुलाई 2001 में जरूरी इलाज के लिए क्वेटा (पाकिस्तान) से दुबई के एक अस्पताल में कुछ सहयोगियों सहित आया व 10 दिन रहा। माना जाता है कि इस समाचर पत्र को यह जानकारी फ्रैंच गुप्तचर एजेंसियों से प्राप्त हुई थी। इसके बाद चर्चा में रहा कि क्वेटा में बिन लादेन, अलकायदा से यहां के कुछ व्यक्तियों का संबंध बना रहता था और क्वेटा में उनसे मिलने शिकार के बहाने कुछ व्यक्ति जाते थे।

9/11 के हमले से मात्र दो दिन पहले अफगानिस्तान में तालिबान शासन के प्रबल विरोधी ‘पंजशीर के शेर’ अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी गई। माना जाता है कि यह हमला अल कायदा और तालिबान के गठबंधन से हुआ पर इसके तार आई.एस.आई. से भी जुड़े होने की पूरी संभावना है। अहमद शाह मसूद को अफगानिस्तान में लोकतंत्र, महिलाओं की समानता व एकता स्थापित करने वाले भावी नेता के रूप में व्यापक मान्यता मिल रही थी। उन्हें यूरोपीयन पार्लियामेंट में भाषण के लिए अप्रैल 2001 में बुलाया गया था व भारत से भी उन्हें सहायता प्राप्त हो रही थी। इन वजहों से व मसूद द्वारा पाकिस्तान की अफगानिस्तान में भूमिका की कड़ी आलोचना से आई.एस.आई. चिंतित था व इस कारण मसूद की हत्या में उसकी भूमिका की संभावना बढ़ती है।

एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जिन हत्यारों ने पत्रकारों के वेश में मसूद की हत्या की, उसके आचरण से यह स्पष्ट होता है कि वे यह कार्य हर हालत 11 सितंबर से पहले करना चाहते थे। उन्होंने मसूद से इंटरव्यू मांगते हुए जोर दिया था कि यह इंटरव्यू देर से देर 10 सितंबर तक हो जाना चाहिए अन्यथा वे बिना इंटरव्यू लिए ही लौट जाएंगे। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि जिसने भी मसूद की हत्या की साजिश रची उसे 11 सितंबर पर होने वाले बड़े आतंकवादी हमले के बारे में भी पहले से पता था।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए 9/11 के हमले में पाकिस्तान व विशेषकर आई.एस.आई. के संबंधों की व्यापक जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। 9/11 के 20 वर्ष शीघ्र ही पूरे हो रहे हैं अतः संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार इस अवसर पर इस जांच को उचित महत्त्व दे सके तो यह इसके लिए बहुत अनुकूल समय होगा। इसमें पहले ही बहुत देर हो चुकी है, अब और देर नहीं होनी चाहिए।

जहां 9/11 के हमले के बारे में सही समझ बनाना बहुत जरूरी है, वहां इस समय तक इसके कुछ महत्त्वपूर्ण पक्षों के बारे में अनिश्चय जारी है। यदि इस हमले के पाकिस्तन से संबंध को बेहतर ढंग से समझने का प्रयास पूरी ईमानदारी से किया जाए, तो इससे 9/11 के हमले की सही साजिश समझने में बहुत मदद मिलेगी। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

 

बाबूलाल नागा
बाबूलाल नागाhttps://bharatupdate.com
हम आपको वो देंगे, जो आपको आज के दौर में कोई नहीं देगा और वो है- सच्ची पत्रकारिता। आपका -बाबूलाल नागा एडिटर, भारत अपडेट
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments