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Tuesday, April 16, 2024
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आईआईटी जोधपुर ने प्रस्तावित किया, क्राउडसोर्स्ड बर्ड डेटा से थार रेगिस्तान के चार क्षेत्रों का अध्ययन किया जा सकता है

भारत अपडेट, जोधपुर। हाल के दिनों में आईआईटी जोधपुर के अध्ययन में थार रेगिस्तानी वातावरण के चार क्षेत्रों को समझने में क्राउडसोर्स्ड (ऑनलाइन) बर्ड डेटा एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में सामने आया है। इस शोध में क्राउडसोर्स्ड बर्ड डेटा के महत्व पर जोर दिया गया है, जो रेगिस्तानी वातावरण के क्षेत्रों को समझने, कृषि-खेतों के मानवीय प्रभावों का मूल्यांकन करने और भौगोलिक क्षेत्रों और जैव विविधता के बीच जटिल संबंधों को पता लगाने में एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में सामने आया है। इस डेटा के उपयोग से पक्षी प्रजातियों की जानकारी, कृषि प्रभावों, भूगोल और जैवविविधता के बीच संबंधों के बारे में मूल्यवान जानकारी हासिल किया जा सकता है। इस शोध में ईबर्ड के ओपन सोर्स क्राउडसोर्स्ड डेटा का उपयोग किया गया है और इसके सहयोगी भागीदार बीएसबीई विभाग, आईआईटी जोधपुर, सीएसई विभाग, आईआईटी जोधपुर और जोधपुर सिटी नॉलेज एंड इनोवेशन क्लस्टर है।

थार भारतीय रेगिस्तान अपनी अनोखी जैव विविधता और नाजुक वातावरण तंत्र के लिए जाना जाता है। हालांकि, विभिन्न मानवजनित गतिविधियों और व्यापक डेटा की कमी के कारण इस क्षेत्र की वातावरण विशेषताओं और इसके विभिन्न जैविक समुदायों के वितरण की समझ सीमित है। किसी भी क्षेत्र के वातावरण का मूल्यांकन करने के लिए पारंपरिक तरीकों में अक्सर महत्वपूर्ण संसाधनों, समय और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जिससे पर्याप्त डेटा एकत्र करना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

इस तरह के शोध की कमी को ध्यान में रखते हुए जोधपुर सिटी नॉलेज इनोवेशन फाउंडेशन से जुड़ी परिस्थिति विज्ञानशास्री डॉ. मानसी मुखर्जी, आईआईटी जोधपुर के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अंगशुमन पॉल, बायोसाइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. मिताली मुखर्जी, आईआईटी जोधपुर ने थार रेगिस्तान में चार पारिस्थितिक क्षेत्रों को परिभाषित करने के लिए क्राउडसोर्स्ड वर्ड डेटा को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उपयोग करने का सुझाव दिया है। यह शोध पत्र https://doi.org/10.1016/j.gecco.2023.e02559  पर प्रकाशित किया है।

शोध के महत्व के बारे में बात करते हुए आईआईटी जोधपुर के बायोसाइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर और हेड डॉ. मिताली मुकर्जी ने कहा, “थार एक प्राकृतिक लैबोरेटरी के रूप में कार्य करता है, जो यहां के घटकों एवं प्रजातियों के पनपने, उनकी परस्परता और समूचे वातावरण तंत्र के संरक्षण के लिए नवाचारी ‘डिज़ाइंस’ की सुविधा प्रदान करता है।“

पहले थार रेगिस्तानी क्षेत्र को एक ही पारिस्थितिकीय क्षेत्र माना जाता था, लेकिन हाल ही के अध्ययन ने इसके चार अलग पारिस्थितिकीय क्षेत्रों की पहचान की है: जोकि पूर्वी थार, पश्चिमी थार, संक्रमणीय क्षेत्र और खेती विकसित क्षेत्र हैं।

शोध के परिणाम निम्नलिखित हैं:

  • खेती योग्य क्षेत्र को तीन दूरस्थ भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित पाया गया है, इसमें मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरण विखंडन का हुआ है जोकि पारिस्थितिकीय क्षेत्र के एक नए उभरते हुए स्वरूप की ओर इशारा कर रहा है।
  • खेती विकसित क्षेत्र में सबसे कम विविधता (α विविधता) और प्रजाति संरचना में सबसे अधिक परिवर्तन (β विविधता) देखा गया है, जिससे इस क्षेत्र की अद्वितीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए इस क्षेत्र में पुनर्स्थापना के प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
  • यह अध्ययन क्राउडसोर्स्ड (ऑनलाइन) बर्ड डेटा की महत्व पर जोर देता है जो पारिस्थितिकीय क्षेत्रों को समझने, कृषि-खेतों के प्रभाव का मूल्यांकन करने और भौगोलिक क्षेत्रों और जैव विविधता के मध्य एक पारिस्थितिकीय प्रणाली में संबंध की जांच करने में सहयोग प्रदान करता है इसलिए इसका उपयोग मूल्यवान साधन के रूप में किया जा सकता है।

भविष्य के अध्ययन हेतु रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र में बायोटा आधारित स्थिरता आकलन को बढ़ाने व विभिन्न पोषक स्तरों में स्थानीय विभिन्नता की खोज पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त संरक्षण योजना हेतु पारिस्थितिकी क्षेत्रों की सूक्ष्म इकाइयों के अंतर्गत उपस्थित विभिन्नता, स्थिरता व दीर्घकालिक स्थिरता पर उनके प्रभाव की जांच करना और उनकी व्यापक समझ रखना महत्वपूर्ण है।

आईआईटी जोधपुर के बारे में

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर की स्थापना 2008 में भारत में प्रौद्योगिकी शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। संस्थान भारत के आर्थिक विकास को लाभ पहुंचाने के लिए तकनीकी सोच और कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। आइआइटी जोधपुर की  तीन प्रेरक शक्तियाँ हैं जोकि शिक्षण और सीखने में छात्रवृत्ति; अनुसंधान और रचनात्मक उपलब्धियों में छात्रवृत्ति; और उद्योग के लिए अनुकूल शिक्षा प्रदान करना है।

आइआइटी जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 62 पर जोधपुर के उत्तर-पश्चिम में नागौर की ओर 852 एकड़ के अपने विशाल आवासीय स्थायी परिसर से कार्य करता है। इस परिसर को सावधानीपूर्वक नियोजित किया गया है और शिक्षाविदों के प्रतीक के रूप में खड़े होने की कल्पना की गई है। संस्थान और उद्योग संबंधों को मजबूत करने के लिए एक प्रौद्योगिकी पार्क के विकास के लिए स्थायी परिसर जोकि लगभग 182 एकड़ का है को अलग से रखा गया है।

संस्थान प्रौद्योगिकी विकास के एक बहु-विषयक दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए इसने बुनियादी अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की है और विभागों के माध्यम से अपनी एकेडमिक डिग्री गतिविधियों और प्रौद्योगिकी केंद्रों के माध्यम से इसके समन्वित अनुसंधान का आयोजन किया है।

 

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