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Wednesday, June 19, 2024
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रामेश्वर वाल्मीकी हत्याकांडः दलित अधिकार केंद्र के जांच दल ने मृतक के परिजनों से की मुलाकात, जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को दिया ज्ञापन

टीम भारत अपडेट, झुंझुनूं। दलित अधिकार केंद्र का पांच सदस्य जांच दल दलित अधिकार केंद्र के सहायक निदेशक एडवोकेट चंदा लाल बैरवा के नेतृत्व में 29 मई 2024 को सूरजगढ़ थानान्तर्गत बलौदा गांव का दौरा किया। स्मरण रहे 14 मई 2024 को रामेश्वर वाल्मीकी की गई हत्या के प्रकरण में दलित अधिकार केंद्र का जांच दल मृतक के परिजनों से मिला। जांच दल में दलित अधिकार केंद्र, जयपुर के सहायक निदेशक एडवोकेट चंदा लाल बैरवा, केंद्र के रिसर्च व कम्यूनिकेशन ऑफिसर तौफिक नदीम, राजस्थान वाल्मीकी विकास मंच के प्रदेश संयोजक राकेश वाल्मीकी, सफाई कर्मचारी आंदोलन के पवन नकवाल, उदयपुरवाटी के सामाजिक कार्यकर्ता व एडवोकेट हंसराज कबीर ने मृतक के परिजनों, दलित समुदाय, स्थानीय निवासियों से गांव में मिलकर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। जांच दल ने पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर झुंझुनूं को ज्ञापन देकर जांच दल के सामने आए चौंकाने वाले तथ्यों से अवगत करवाया गया।

घटना का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार हैः- दिनांक 14 मई 2024 को सायं रामेश्वर वाल्मीकी व जेठूराम नायक बाजार से घर लौट रहा था उसी समय आरोपी सिन्टीयों पुत्र महावीर मेघवाल, प्रवीण कुमार पुत्र पप्पू मेघवाल, निवासी बलौदा पलसर मोटरसाइकिल से आए तथा दूसरी मोटरसाइकिल ड्रीम योगा मोटरसाइकिल पर सुभाष पुत्र महावीर बावरिया निवासी बलौदा आए और रामेश्वर को जबरदस्ती मोटरसाइकिल पर ले गए और सूरजमल की हवेली में ले गए वहां पर पहले से मौजूद पर दीपेंद्र सिंह उर्फ चिंटू हिस्ट्रीसीटर, प्रवीण उर्फ पीके, प्रवीण उर्फ बाबा, सुभाष उर्फ चिंटू व सतीश उर्फ सुखा उक्त व अन्य आरोपी रामेश्वर वाल्मीकी के हाथ-पांव बांधकर उल्टा लटका दिया तथा बेरहमी से लाठी, डंडों से गंभीर मारपीट की जिसके कारण से रामेश्वर वाल्मीकी की मौके पर पर ही मौत हो गई। आरोपियों ने रामेश्वर वाल्मीकी को अचेत होने पर उसे हरियाणा के निजी अस्पताल में लेकर गए वहां पर डॉक्टरों ने उसे देख कर मृत घोषित कर दिया। शराब माफियाओं ने मृतक रामेश्वर वाल्मीकी को रात के समय पिकअप में डाल कर मृतक को उसके घर के पास पटक कर चले गए।

उक्त घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट सं.0144/24 दिनांक 15 मई 2024को पुलिस थाना सूरजगढ़ में अंतर्गत धारा 143, 341, 323, 362, 342, 302, 201 आईपीसी व 3(2) (अ)  अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 में दर्ज किया गया लेकिन अभी तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अभी भी एक आरोपी फरार चल रहा है।

उल्लेखनीय है कि रामेश्वर वाल्मीकी को शराब माफिया ने इसलिए गंभीर मारपीट की थी कि वो शराब माफियाओं के ठेके से शराब नहीं लेकर अन्य ठेके से शराब लेता था जिसके कारण से शराब माफिया रामेश्वर वाल्मीकी को सबक सिखाना चाहते थे। शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद थे कि 14 मई की घटना का पुलिस को जब पता चला, जब वीडियो वायरल हुआ, यदि वीडियो वायरल नहीं होता तो शायद रामेश्वर वाल्मीकी की हत्या का खुलासा नहीं होता।

आरोपी दबंग प्रभावशाली है। शराब माफिया गिरोह से जुड़े हुए है। इस बात की भी पूरी-पूरी आशंका है कि आरोपियों के स्थानीय पुलिस से सांठ-गांठ होने के कारण से आरोपी सूरजगढ़ थाना क्षेत्र में गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। दीपेंद्र सिंह उर्फ चिंटू जो की अपराधी प्रवृति का व्यक्ति है तथा पुलिस थाना सुजानगढ़ का हिस्ट्रीसीटर है ऐसे असामाजिक व अपराधी प्रवृति के लोगों को शराब का ठेका आवंटित करना क्षेत्र में अपराध को बढ़ावा देना है।

अतः घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दलित अधिकार केंद्र मांग करता है किः-

  • उक्त प्रकरण में दलित मृतक रामेश्वर वाल्मीकी का अपहरण कर, हवेली में बंधक बना हाथ-पैर बांधकर उल्टा लटका कर, पीट-पीट कर जान से मारने के प्रकरण में पुलिस थाना सुरजगढ़, जिला झुंझुनूं में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट सं. 0144/2024 में नामजद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
  • आरोपियों द्वारा हत्या के दौरान काम में ली गई लाठी, डंडा, सरिया बरामद किया जाए।
  • आरोपियों द्वारा पीड़ित का अपहरण करने में उपयोग में ली गई दोनों मोटरलाइकिल बरामद की जाए।
  • हत्या करने के बाद में मृतक का उसके घर के पास में पिकअप में डाल कर चले गए उस पिकअप को भी जप्त किया जाए।
  • शराब माफिया सूरजमल की हवेली को शराब गोदाम के नाम पर शराब व अनैतिक गतिविधियों का अवैध ठिकाना बना रखा है उस पर रोक लगाई जाण् व हवेली मालिक सूरजमल से पूछताछ की जाए।
  • जिस हवेली में पीड़ित के साथ गंभीर मारपीट की गई उस कमरे को सील किया जाए ताकि अन्य साक्ष्य मिल सके।
  • सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाए।
  • सभी आरोपियों के मोबाइल जप्त किए जाए तथा उनकी कॉल डिटेल निकाल कर घटनाक्रम से जोड़ कर जांच में शामिल किया जाए।
  • ग्राम बलौदा में मृतक दलित परिवार की सुरक्षा के लिए स्थाई पुलिस चौकी स्थापित की जाए।
  • इस प्रकरण में संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया जाए व अपराधी प्रवृति के लोगों को पाबंद किया जाए।
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामजद आरोपियों के विरुद्व सी.आई.डी. सी.बी., अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धारा 15 -ए (10) के अन्तर्गत प्रकरण की सम्पूर्ण अन्वेषण की वीडियो रिकॉडिंग की जाकर अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनिमय 2015 के नियम 7 के तहत 60 में जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया जाए।
  • उक्त दोनों प्रकरणों की जांच वैज्ञानिक तकनीकी से अपना कर अन्वेषण सम्पादित किया जाए।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनिमय 2015 के नियम 12 (4) (45) के अन्तर्गत शव परीक्षा के स्तर पर 4,12, 500/-रुपए अविलम्ब मृतक के आश्रितों को अदा किया जाए तथा नियम 12 (4) (46) के अंतर्गत मृतक के आश्रितों को तीन माह का राशन, बर्तन, गेहूं, दाल आदि खाद्य सामग्री, उपलब्ध करवाई जाए।
  • प्रकरण में अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनिमय 2015 के नियम 15-(2) (डी) सपठित नियम 12 (4) 46 के अंतर्गत पीड़ित परिवार को अतिरिक्त सहायता के रूप में मृतक की पत्नी/पुत्र को नौकरी प्रदान की जाए।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनिमय 2015 के अंतर्गत पीड़ित को आर्थिक एवं संपूर्ण सामाजिक पुनर्वास हेतु संपूर्ण प्रकरण जिला स्तरीय निगरानी एवं सतर्कता समिति के सामने वैज्ञानिक तरीकों से संपूर्ण जांच करवाई जाए।
  • झुंझुनूं जिला दलित अत्याचार के मामलों में अति संवेदनशील अत्याचार परक क्षेत्र है। अतः अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनिमय 1995 के नियम 16 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय मॉनिटरिंग एवं विजिलेंस कमेटी उक्त अधिनियम के अंतर्गत पंजीबद्व प्रत्येक मामलों की जांच गहनता एवं सूक्षमता से एवं अधिनियम एवं नियमों के प्रावधानों की क्रियांविति तथा अधिकारियों के कार्यपालन का पुर्नावलोकन प्रत्येक तीन माह में किया जाए।
  • आरोपियों के नाम से संचालित शराब के ठेके का लाइसेंस निरस्त किया जाए व भविष्य में प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामजद आरोपी को शराब का ठेका आवंटित नहीं किया जाए। आरोपियों को स्थाई रूप से ब्लेक लिस्ट किया जाए ताकि वो आवेदन ही नहीं कर सके।
  • आरोपी दंबग, प्रभावशाली, उच्च राजनीतिक पहुंच वाले हैं। अतः प्रकरण की जांच स्थानीय पुलिस से पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों की एसाईटी गठित कर करवाई जाए।
  • मुख्यमंत्री एक्सग्रशिया मद में से विशेष प्रकरण मानकर मृतक आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में कम से कम 50 लाख रुपए की सहायता दिलाई जाए।
  • एससी/एसटी (अ.नि) नियम 1995 के नियम 15(1) (घ) सपठित नियम 12(4)(46) के अन्तर्गत मृतक के आश्रित अथवा परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
  • जिला कलेक्टर झुंझुनूं हाल ही में 02.2024 को अधिसूचित गजट राजस्थान अनुसूचित जाति/जनजाति पुर्नवास योजना-2024 के अंतर्गत मृतक के परिवार/आश्रित को निम्न राहत, सहायता, पुर्नवास दिया जाए-

(क) यह कि उपनियम 5(3) (पप)(पपप)के अंतर्गत पीड़ित के आश्रितों को 3 माह के लिए गेहूं, चावल, दलहन, बर्तन आदि 7 दिवस में उपलब्घ करवाना सुनिश्चित करें।

(ख) यह कि उपनियम 5(3) (पप)(पपप) के अंतर्गत पीड़ित के आश्रितों को आवासीय कॉलेज में अविलम्ब प्रवेश दिलवाया जाए।

(ग) यह कि उपनियम 5(3) (पप)(पपप)के अंतर्गत पीड़ित के आश्रितों को शहरी क्षेत्र में  उचित मूल्य कि दुकान का आवंटन किया जाए।

(घ) यह कि उपनियम 5(3) (प) के अंतर्गत पीड़ित के आश्रितों को मृतक के पीड़ित परिवार को अविलम्ब पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाना सुनिश्चित किया जाए।

  • यह कि पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए मामले को “केस ऑफिसर स्कीम” के तहत शामिल कर मामले में अविलंम्ब ”केस ऑफिसर” नियुक्त किया जाए और पुलिस महानिदेशक को निर्देश किया जाए।
  • एससी/एसटी (अ.नि) नियम 1995 के नियम-7 के अंतर्गत उपरोक्त प्रकरण की जांच 15 दिवस में पूर्ण कर एससी/एसटी स्पेशल कोर्ट में चालान पेश करने की कार्यवाही की जाए।

जिला कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक झुंझुनूं ने जांच दल की सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुनकर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

 

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