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Wednesday, June 19, 2024
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सामुदायिक रेडियो पर गूंज रही है आवाज़

 

-अनीस आर खान

स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 फरवरी से देश भर के कई राज्यों में एमडीए-आईडीए अभियान शुरू किया जा रहा है. अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों की टीम लोगों के घर-घर जाकर फाइलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से देश के नागरिकों को बचाने के लिए दवाएं खिलाएंगी। इसी क्रम में जन जागरूकता फैलाने के लिए सामुदायिक रेडियो हर तरह के प्रयास कर रहे हैं. वह अपने विभिन्न प्रोग्रामों जैसे आरजे लिंक, प्रोमो, कहानियां, साक्षात्कार, स्लोगन, गीत इत्यादि में लोगों से अपील कर रहे हैं कि “फरवरी 10, याद रखना बस” ताकि अधिक से अधिक लोग इन दवाओं का सेवन करके अपने जीवन को सुरक्षित कर सकें।

सुदूर क्षेत्र में जहां समाचार पत्रों का पहुंचना मुश्किल होता है और यदि पहुंच जाए तो लोगों को पढ़ने में परेशानी आती है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए सामुदायिक रेडियो बड़ी अहम भूमिका निभाती है इसका दायरा सीमित होता है लेकिन इसके श्वेता गण बहुत ही ध्यान से 1-1 शब्दों को अपने अर्थों समेत अच्छी तरह से समझ लेते हैं. क्योंकि इसमें भाषा या साक्षरता बाधित नहीं होती। स्थानीय बोली में स्वास्थ्य विभाग की बात ग्रामीणों तक पहुंचाने में सामुदायिक रेडियो पूरी तरह सक्षम है. दूसरी ओर रेडियो के श्रोता इन प्रोग्रामों को सुनकर फोन करके अपने सवाल भी पूछते हैं. वह यह भी जानना चाहते हैं कि 10 फरवरी को दवा कहां मिलेगी? कैसे मिलेगी? इत्यादि.

सात राज्यों के 26 रेडियो स्टेशन अभियान में शामिल: श्रीमती अर्चना कपूर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के इस विशेष अभियान में सात राज्यों के 26 सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के आरजे (रेडियो जॉकी) फाइलेरिया रोधी दवा खाने के लिए स्थानीय भाषा में “फरवरी दस, याद रखना बस” कहकर लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जिसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

स्मार्ट एनजीओ सहायता कर रहा है: दिल्ली स्थित स्मार्ट एनजीओ देश भर में कई सामुदायिक रेडियो के साथ काम कर रहा है। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में भी उपरोक्त सभी राज्यों के 26 सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। रेडियो स्टेशनों के प्रबंधकों और आरजे को सामग्री के साथ-साथ अन्य सहायता प्रदान करने के अलावा स्मार्ट एनजीओ द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।

एक माह तक चलेगा जागरुकता अभियान: स्मार्ट एनजीओ की संस्थापक एवं प्रमुख श्रीमती कपूर ने बताया कि सामुदायिक रेडियो पर फिलेरिया जागरूकता अभियान 1 से 28 फरवरी तक विभिन्न रूपों में चलेगा।

फाइलेरिया की दवाएं जरूर खाएं: फाइलेरिया के संबंध में श्रीमती कपूर ने कहा कि फाइलेरिया शरीर को कमजोर और कुरूप बनाने वाली एक खतरनाक बीमारी है। यह दीर्घकालिक विकलांगता का प्रमुख कारण है। इस बीमारी के लक्षण दिखने में 5 से 15 साल लग जाते हैं। हाथी पांव रोग का कोई इलाज नहीं है, इसलिए फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करना बेहतर है। इस लिये अपने क्षेत्र की सामुदायिक रेडियो सुनते रहें, और फाइलेरिया के संबंध में बाखबर रहें।

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