31.8 C
New York
Friday, June 5, 2026
Homeविविधमैं अंधेरों में मशालें जलाऊंगा

मैं अंधेरों में मशालें जलाऊंगा

मुनेश त्यागी

 मैं आधा हिंदू हूं
आधा मुसलमान हूं,
कोई माने ना माने
मैं पूरा हिंदुस्तान हूं।

वो नफरतें बोता है
दुश्मनी उगाता है,
मैं मोहब्बतें बोता हूं
भाईचारा उगाता हूं।

वो नफरतों का जहर घोलते हैं
मैं मोहब्बतों की फसलें उगता हूं,
वो जहानों में जहर भरते हैं
मैं भाईचारे की नस्लें उगाता हूं।

छुप जाने दो अब तो सूरज को
मैं रातों में ही मशालें जलाऊंगा,
सूरज की फितरत है छुप जाने की
मेरी भी आदत है मशालें जलाने की।

घनघोर अंधेरा हुआ तो क्या हुआ
सूरज और मैं आते ही रहेंगे,
वो जालिम हुए तो कोई बात नहीं
हम बनकर साथी आते ही रहेंगे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments